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आर्थिक नियोजन तथा पंचवर्षीय योजनाएं

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Md Afroz Alam
आर्थिक नियोजन तथा पंचवर्षीय योजनाएं?

आर्थिक नियोजन एक ऐसी योजना होती है जो किसी विशेष समयावधि के लिए आर्थिक विकास तथा आर्थिक व्यवस्था को निर्धारित करती है। इस योजना में आमतौर पर सरकार द्वारा विकास की प्राथमिकताएं, विभिन्न क्षेत्रों में निवेश, वित्तीय नीतियों और अन्य आर्थिक मुद्दों को समाधान करने के लिए कार्रवाई की जाती है।

पंचवर्षीय योजना एक विशेष प्रकार का आर्थिक नियोजन होता है जो पांच साल के लिए तैयार किया जाता है। इस योजना में विभिन्न क्षेत्रों में विकास की प्राथमिकताएं तथा सरकार के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतियों और कार्रवाइयों को निर्धारित किया जाता है। इस योजना में आमतौर पर संचार, वित्त, कृषि, उद्योग, ऊर्जा तथा शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास की प्राथमिकताएं निर्धारित की जाती हैं।

दोनों योजनाएं अर्थव्यवस्था तथा समाज के लिए उपयोगी होती हैं तथा समाज की आर्थिक विकास को बढ़ावा देती

Md Afroz Alam
भारत की पंचवर्षीय योजनाएं कितने प्रकार की है

भारत में अब तक चार प्रकार की पंचवर्षीय योजनाएं लागू की गई हैं।

  1. पहली पंचवर्षीय योजना (1951-1956) - इस योजना में भारत के विकास के लिए मूल नीतियों को तैयार करने का प्रयास किया गया था। इस योजना के माध्यम से भारत के आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने तथा उद्योग तथा कृषि के क्षेत्र में विस्तार करने का प्रयास किया गया था।

  2. दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-1961) - इस योजना में उद्योग, कृषि तथा सामाजिक क्षेत्रों में विकास को मजबूत बनाने के लिए कार्रवाई की गई थी। इस योजना के माध्यम से वित्तीय संसाधनों को उन्नयन करने तथा आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने का प्रयास किया गया था।

  3. तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-1966) - इस योजना के माध्यम से भारत के आर्थिक विकास को तेजी से बढ़ाने का प्रयास किया गया था। इस योजना में भारत के वित्तीय विकास को सुदृढ़ करने तथा उद्योग तथा कृषि के क्षेत्र में विस्तार करने का

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आठवीं पंचवर्षीय योजना

आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997) भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पंचवर्षीय योजना थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के आर्थिक विकास को सुदृढ़ बनाने तथा देश की अर्थव्यवस्था में परिवर्तन लाने का था। इस योजना में भारत के उत्पादन के सेक्टरों के विकास को बढ़ावा दिया गया था और विदेशी निवेश को आमंत्रित करने के लिए उद्योग नीति में सुधार किया गया था। इस योजना में उच्च शिक्षा, प्रौद्योगिकी, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में निवेश करने का भी प्रयास किया गया था।

भारत में नियोजन की प्रमुख समस्याएं

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